
रिश्ता तोड़ता कोई नहीं, टूट जाता है,
जब हिरण्येकश्यप बाप बनके, प्रहलाद को कूट जाता है,
जब कैकयी वचन सुनके, राम दशरथ से छूट जाता है,
जब भाई कौरव बनके, लूट जाता है,
रिश्ता तोड़ता कोई नहीं, टूट जाता है,
रिश्ता तोड़ता कोई नहीं, टूट जाता है,
जब गोडसे यम बनके, आत्मा को भून जाता है,
जब सुभाष का व्यर्थ बनके, खून जाता है,
जब लाल के जिगर में भोजन बनके, शूल जाता है,
जब पडोसी पास बनके, भूल जाता है
रिश्ता तोड़ता कोई नहीं, टूट जाता है,
जब सही संस्कृति का आधार, छूट जाता है !!--
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